दक्षिणेश्वर काली मंदिर
यह स्थान कोलकाता के हुगली नदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो देवी काली को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 1855 में रानी रासमणि ने करवाया था, जो एक परोपकारी और देवी काली की भक्त थीं। मंदिर की स्थापना से जुड़ी कथा के अनुसार, रानी रासमणि को बनारस यात्रा से पहले एक स्वप्न में देवी काली ने प्रकट होकर गंगा नदी के तट पर एक मंदिर बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद, रानी ने दक्षिणेश्वर में इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया।
मंदिर की वास्तुकला बंगाल की नवरत्न शैली में निर्मित है, जिसमें नौ शिखर हैं। मुख्य गर्भगृह में देवी भवतारिणी (देवी काली का एक रूप) की मूर्ति स्थापित है, जो भगवान शिव के सीने पर खड़ी हैं। मंदिर परिसर में बारह शिव मंदिरों की श्रृंखला, एक राधा-कृष्ण को समर्पित विष्णु मंदिर, नट मंदिर, गाजी ताल, कुथि बारी, बकुल ताल घाट, और पंचवटी जैसे अन्य आकर्षण भी हैं।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर का समय इस प्रकार है:
प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे
दोपहर 3:00 बजे से रात 8:30 बजे तक
मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
गुवाहाटी, असम से दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता पहुंचने के लिए आप निम्नलिखित विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं:
Flight ✈️ से:
गुवाहाटी से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। कोलकाता के Netaji Subhash Chandra हवाई अड्डे से दक्षिणेश्वर काली मंदिर की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है, जिसे टैक्सी या बस के माध्यम से तय किया जा सकता है।
रेल मार्ग से:
गुवाहाटी से कोलकाता के लिए कई ट्रेनें चलती हैं, जो हावड़ा या सियालदह रेलवे स्टेशन तक जाती हैं। इन स्टेशनों से आप लोकल ट्रेन, मेट्रो, बस या टैक्सी के माध्यम से दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से:
गुवाहाटी से कोलकाता की दूरी लगभग 1,000 किलोमीटर है। आप राष्ट्रीय राजमार्ग 27 और 16 के माध्यम से सड़क मार्ग से यात्रा कर सकते हैं, लेकिन यह विकल्प समय-साध्य हो सकता है।
कोलकाता पहुंचने के बाद, आप मेट्रो रेल, लोकल ट्रेन, बस या टैक्सी के माध्यम से दक्षिणेश्वर काली मंदिर आसानी से पहुंच सकते हैं। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए उचित समय निर्धारित करें, ताकि आप सभी धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकें।

