बाल Ganesha से जुड़ी एक नटखट कहानी :: Short Story

💖💖💖 Ganesh जी की बाल अवस्था से जुड़ी एक नटखट कहानी💖💖💖

 

एक बार की बात है, गणेश जी अपने बचपन के दिनों में कैलाश पर्वत पर खेल रहे थे। उनकी मासूमियत और नटखट स्वभाव ने सभी देवताओं को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया था। उनकी मां, माता पार्वती, उनके खेलों को देखती और आनंदित होती थीं।

 

गणेश जी को मोदक बहुत पसंद थे, और वे हमेशा अपनी मां से मोदक बनाने की जिद किया करते थे। एक दिन, माता पार्वती ने उनके लिए ढेर सारे मोदक बनाए और कहा, “गणेश, ये सारे मोदक तभी मिलेंगे जब तुम पहले स्नान करोगे।” गणेश जी को स्नान करना पसंद नहीं था, लेकिन मोदक के लालच में वे तुरंत तैयार हो गए।

 

जब वे स्नान करने गए, तो उन्होंने सोचा, “अगर मैं नहा भी लूं, तो क्या गारंटी है कि कार्तिकेय भैया मेरे मोदक न खा लें?” यह सोचते हुए उन्होंने एक तरकीब सोची। गणेश जी ने अपनी छोटी सूंड से पास के जंगल से कुछ मिट्टी और पत्तियां उठाईं और एक नकली गणेश बना दिया। उन्होंने उसे अपने कपड़े पहना दिए और पास बिठा दिया।

 

फिर गणेश जी चुपके से स्नान करने चले गए। कार्तिकेय जब वहां आए, तो उन्होंने सोचा, “अरे! गणेश यहां बैठे हैं, इसका मतलब है कि ये मोदक अभी भी सुरक्षित हैं।” उन्होंने मोदकों को छूने की कोशिश नहीं की। उधर, गणेश जी ने जल्दी-जल्दी स्नान पूरा किया और वापस आकर हंसते हुए बोले, “भैया, ये तो मेरा हमशक्ल है! अब मैं मोदक खा सकता हूं।”

 

माता पार्वती और कार्तिकेय दोनों उनकी नटखट चाल पर हंस पड़े। माता पार्वती ने गणेश जी को गले लगाया और उन्हें सारे मोदक खाने दिए। इस तरह गणेश जी ने अपनी चतुराई और मासूमियत से सभी का दिल जीत लिया।

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