🦚आज 10/01/2025 पुत्रदा एकादशी की दिन🦚
पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे संतान प्राप्ति और संतान की भलाई के लिए रखा जाता है। यह एकादशी वर्ष में दो बार आती है:
- पौष मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी
- श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी
पौराणिक मान्यता:
पुत्रदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
व्रत विधि:
- व्रत के एक दिन पहले दशमी तिथि को सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- व्रत के दौरान कथा सुनें या पढ़ें।
- पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ दिन भर उपवास रखें। अगर स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें।
कथा:
पुत्रदा एकादशी की कथा के अनुसार, भद्रावती नगर के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या के कोई संतान नहीं थी। वे संतान प्राप्ति के लिए चिंतित रहते थे। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर तप किया। ऋषियों के निर्देशानुसार, उन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
महत्व:
यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति के लिए, बल्कि बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भी किया जाता है।
आध्यात्मिक रूप से, यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।


